किरण बेदी की उपस्थिति में न्यू जर्सी में उनकी फिल्म "यस मैडम, सर" का चित्रण-----------
किरणबेदी: "भारत पुलिस सेवा" की पहली महिला अधिकारी (अब सेवानिवृत) या एक समाजसेवी याएक आन्दोलनकारीया यूं कहें कि एक बहु-आयामी प्रतिभा |
हाल ही में स्वयं अभिनीत और स्वयं के जीवन पर आधारित फिल्म "यस मैडम, सर" के स्क्रीनिंग के सिलसिले में किरण जी का अमरीका में आगमन हुआ | २३ सितम्बर २०१२ को टीवी एशिया के एडिसन, न्यू जर्सी स्टूडियो में करीब २०० लोगों की उपस्थिति में यह फिल्म दिखाई गयी और किरण जी के साथ "सवाल-जवाब" का कार्यक्रम हुआ |
तालियों की बौछार के बीच करीब डेढ़ घंटे की फिल्म ने दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखा | फिल्म के प्रारम्भ में जहां किरण बेदी एक पुरुष प्रधान भारतीय पुलिस के बीच अपन स्थान बनाती हुई दिखाई दी वहीं कुछ देर बाद वो एक ऐसे जुझारू अधिकारी के रूपमें दिखाई दी जो कि विपरीत परिस्थितियों में अपना स्थानान्तरण पाकर अपनी मानसिक व शारीरिक शक्ति के बल पर अपने आपको प्रशिक्षित करती है | यह भी दिखाया गया पुलिस अधिकारियों, नौकरशाहों और अखबारों द्वारा उनकी इमानदारी को प्रोत्साहित या पुरुस्कृत करना तो दूर, सज़ा के तौर पर उनके मनोबल को तोड़ने की भरपूर कोशिश की गयी | चाहे "तिहाड़जेल" हो या "पुलिसअकादमी", हर जगह सेवा करने की इच्छाशक्ति ने उन्हें कुछ ऐसा काम ढूँढने पर मजबूर किया जिससे की वर्तमान परिस्थितिओं को बेहतर बनाया जा सके | बाधाओं ने उन्हें विचलित भले ही किया हो, पर उन्हें अपने रास्ते से हटा न सकी | हार से डरना नहीं बल्कि सतत प्रयासरत रहना ही किरण जी का मूलमंत्र है|किरण जी के जीवन को अगर एक शब्द में समेटा जाए तो वो होगा : शिक्षा | किरण जी कहती हैं की छोटे बच्चे अपने माता-पिता और विद्यालय का चुनाव नहीं कर सकते, लेकिन माता-पिता और विद्यालय में मिली शिक्षा ही हमें हमारा भविष्य दिलाती हैं | बच्चों को शिक्षित करने की ललक में उन्होंने "नवज्योति दिल्ली पुलिस फाऊंडेशन" की स्थापना की और दिल्ली के आसपास की झुग्गी-झोंपड़ियों और आस-पास के गावों में बाल-शिक्षा में कार्य किया | किरण बेदी जैसे जीते जागते "हीरो" द्वारा बुराई पर सच्चाई की जीत पर हम तालिया कितनी ही बजा लें, लेकिन यह फिल्म सिद्ध करती है कि भारतीय पुलिस और नौकरशाही में सच्चाई को उभारने की सख्त आवश्यकता है | इस दिशा में सिर्फ भारत सरकार या राज्य सरकारों को ही नहीं बल्कि हर आम आदमी को कार्य करना होगा | किरण जी के जीवन से यह भी लगता है की अगर सही व्यक्तियों (चाहे वो महिला हो या पुरुष) के हाथ में शक्ति दे दी जाए तो कई सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं |
फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद, किरण बेदी जी ने दर्शकों के प्रशनों का उत्तर दिया | भारत को बेहतर बनाने के बारे में अपनी राय के बारे में पूछे जाने पर किरण जी कहा की हर भारतीय (चाहे प्रवासी अथवा अप्रवासी) को इसके लिए प्रयास करने होंगे | अप्रवासी भारतीयों को उन्होंने IAC (इंडिया अगेंस्ट करप्शन, न्यू जर्सी/न्यू योर्क) जैसी संस्थाओं से जुड़ने का आव्हान किया | IAC न्यूजर्सी/न्यू योर्क के सदस्यों द्वारा पहनी हुई IAC चिन्ह वाली टी-शर्ट को देखते हुए किरण जी ने कहा की अप्रवासी भारतीयों को भारत से आने वाले राजनेताओं से (चाहे वहा किसी भी राजनैतिक पार्टी का हो) मिलने जाना चाहिए और पूछना चाहिए कि क्यों नहीं वे उन तीन बिन्दुओं (सिटिज़न चार्टर, स्वतन्त्र सीबीआई और हर राज्य में लोकायुक्त) को लागू करते जिन पर पिछले वर्ष १६ अगस्त के आन्दोलन के बाद लोकसभा में सहमति बनी थी |
"टीमअन्ना" के आन्दोलन व राजनैतिक पार्टी समूहों में बंटने के बारें में पूछे जाने पर किरण जी ने कहा की दिल्ली मे हुए हाल के २५ जुलाई आन्दोलन के बाद भारत में IAC के कुछ सदस्यों का मत था की जन लोकपाल को लागू करने व एक पारदर्शी प्रशासन के लिए एक नई राजनैतिक पार्टी बनाकर आन्दोलन को राज्य-विधानसभाओं व लोकसभा में पहुंचाना चाहिए | किरण बेदी जी ने कहा की उन्हें ऐसा लगता है कि IAC अभी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है अतएव हमें सिर्फ आन्दोलन पर ही ध्यान देना चाहिए | किरण जी ने कहा कि हो सकता है आन्दोलन का रास्ता सही हो या राजनैतिक पार्टी बनाने का भी रास्ता सही हो, लेकिन हम सबका उद्देश्य एक ही है और वो है जन लोकपाल | कई दर्शकों का मत था कि अब वह समय आ गया है जब IAC को चुनाव में उतरना चाहिए और हमें किरण जी जैसे नेताओं की सख्त आवश्यकता है |
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